New Delhi, 28 अगस्त . उत्तर प्रदेश की रामनगरी अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद अब काशी और मथुरा में मंदिर बनाए जाने की मांग अदालत में लंबित है. इसे लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने Thursday को बड़ा बयान दिया.
मोहन भागवत ने संघ शताब्दी समारोह में कहा कि संघ आंदोलनों में भाग नहीं लेता है. हम जिस एकमात्र आंदोलन में शामिल हुए, वह राम मंदिर था, जिसका हमने पूरा समर्थन किया था. अन्य किसी भी आंदोलन में संघ शामिल नहीं होगा. हालांकि, हिंदू मानस में काशी, मथुरा और अयोध्या का विशेष महत्व है, जिनमें दो जन्मस्थल हैं. हिंदू समाज इसका आग्रह करेगा और इन मामलों में अगुवाई करेगा.
उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से संघ स्वयं इन आंदोलनों में हिस्सा नहीं लेगा, लेकिन उनके स्वयंसेवक भाग ले सकते हैं, क्योंकि वे हिंदू हैं. इन तीन धार्मिक स्थलों को छोड़कर हर जगह मंदिर और शिवलिंग मत ढूंढो, मैं संघ प्रमुख के रूप में यह बात कह रहा हूं. ये भी होना चाहिए कि चलो सिर्फ तीन मंदिर की बात है, तो ले लो, ये भाईचारे के लिए बड़ा कदम है.
मोहन भागवत ने कहा, “जैसा कि मैंने कल कहा था, अंतरराष्ट्रीय व्यापार आवश्यक है और होना भी चाहिए, क्योंकि यह देशों के बीच संबंधों को भी बनाए रखता है. लेकिन यह दबाव में नहीं होना चाहिए, दोस्ती दबाव में नहीं पनप सकती. यह स्वतंत्र होनी चाहिए, आपसी सहमति पर आधारित होनी चाहिए. हमें आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य रखना चाहिए, साथ ही यह भी समझना चाहिए कि दुनिया परस्पर निर्भरता पर काम करती है, और उसी के अनुसार कार्य करना चाहिए.”
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने विकसित भारत पर कहा कि सबसे पहले, देश के लिए जीना और मरना सीखना चाहिए. जब देशभक्ति बढ़ती है, तो देश की सुरक्षा सुनिश्चित होती है; जब उद्यमिता बढ़ती है, तो अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे सुधरती है.
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डीकेपी/
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