अभय सिंह राठौड़, लखनऊ: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में नकली दवाओं की खेप मिलने का मामले की आंच राजधानी लखनऊ तक पहुंच गई है। लखनऊ में 2 मेडिकल एजेंसियों सील किया गया है। जांच में सामने आया कि लखनऊ में 2 सगे भाई नकली दवाओं का कारोबार कर रहे थे। आशियाना की पार्वती मेडिकल एजेंसी और अमीनाबाद की न्यू बाबा मेडिकल एजेंसी को सील किया गया है। दोनों ने अलग-अलग फर्म बनाकर बड़ा नेटवर्क बनाया था। आरोप है कि सुभाष, विक्की नकली दवाओं का कारोबार करते थे।
दो भाई कर रहे थे संचालनजांच में सामने आया है कि दोनों एजेंसियों का संचालन सगे भाई सुभाष और विक्की कुमार कर रहे थे। आरोप है कि दोनों ने अलग-अलग फर्म बनाकर नकली दवाओं का बड़ा नेटवर्क तैयार किया था और नामचीन कंपनियों के नाम पर पूरे प्रदेश में सप्लाई कर रहे थे। मिल रही जानकारी के मुताबिक, आगरा में दो करोड़ रुपये की नकली दवाएं पकड़ी गईं थी।
दवाएं चेन्नई से लखनऊ आ रही थीं, जिनके बिल पार्वती मेडिकल और न्यू बाबा मेडिकल एजेंसी के नाम पर बने थे। दवाएं बीच में ही आगरा में उतार ली गईं और तभी पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ हो गया। यही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि नकली और असली दवाओं के बैच नम्बर तक एक जैसे थे।
एजेंसियों के मालिक फरारबाबा मेडिकल एजेंसी में छापेमारी के दौरान 10 लाख रुपये से अधिक की दवाएं बरामद हुईं है। इनमें से कई दवाएं नशे के रूप में भी इस्तेमाल की जाती थीं। जबकि पार्वती मेडिकल एजेंसी से दवाएं बरामद नहीं हुईं है। दोनों एजेंसियों के मालिक फिलहाल फरार हैं। एसटीएफ और औषधि विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि यह नेटवर्क तमिलनाडु, पुडुचेरी और उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है।
संदिग्ध फर्मों की हुई पहचान10 संदिग्ध फर्मों की पहचान की गई है। लाखों के बिल पर करोड़ों की नकली दवाओं की कालाबाजारी हो रही थी। चेन्नई और पुडुचेरी से हूबहू पैकिंग और क्यूआर कोड वाली नकली दवाएं बनवाकर लखनऊ समेत कई जिलों में सप्लाई की जाती थीं। टीमें अब पुडुचेरी और तमिलनाडु जाकर जांच करेंगी। शासन से अनुमति लेकर वहां संदिग्ध फर्मों और कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दो नामी कंपनियों ने पुष्टि की है कि उनके नाम पर नकली दवाएं बनाई जा रही थीं। तीन कंपनियां आंतरिक जांच कर रही हैं। इस बीच, लखनऊ की हे मां मेडिको और बंसल मेडिकल एजेंसी के गोदामों पर भी छापेमारी की जा रही है।
दो भाई कर रहे थे संचालनजांच में सामने आया है कि दोनों एजेंसियों का संचालन सगे भाई सुभाष और विक्की कुमार कर रहे थे। आरोप है कि दोनों ने अलग-अलग फर्म बनाकर नकली दवाओं का बड़ा नेटवर्क तैयार किया था और नामचीन कंपनियों के नाम पर पूरे प्रदेश में सप्लाई कर रहे थे। मिल रही जानकारी के मुताबिक, आगरा में दो करोड़ रुपये की नकली दवाएं पकड़ी गईं थी।
दवाएं चेन्नई से लखनऊ आ रही थीं, जिनके बिल पार्वती मेडिकल और न्यू बाबा मेडिकल एजेंसी के नाम पर बने थे। दवाएं बीच में ही आगरा में उतार ली गईं और तभी पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ हो गया। यही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि नकली और असली दवाओं के बैच नम्बर तक एक जैसे थे।
एजेंसियों के मालिक फरारबाबा मेडिकल एजेंसी में छापेमारी के दौरान 10 लाख रुपये से अधिक की दवाएं बरामद हुईं है। इनमें से कई दवाएं नशे के रूप में भी इस्तेमाल की जाती थीं। जबकि पार्वती मेडिकल एजेंसी से दवाएं बरामद नहीं हुईं है। दोनों एजेंसियों के मालिक फिलहाल फरार हैं। एसटीएफ और औषधि विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि यह नेटवर्क तमिलनाडु, पुडुचेरी और उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है।
संदिग्ध फर्मों की हुई पहचान10 संदिग्ध फर्मों की पहचान की गई है। लाखों के बिल पर करोड़ों की नकली दवाओं की कालाबाजारी हो रही थी। चेन्नई और पुडुचेरी से हूबहू पैकिंग और क्यूआर कोड वाली नकली दवाएं बनवाकर लखनऊ समेत कई जिलों में सप्लाई की जाती थीं। टीमें अब पुडुचेरी और तमिलनाडु जाकर जांच करेंगी। शासन से अनुमति लेकर वहां संदिग्ध फर्मों और कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दो नामी कंपनियों ने पुष्टि की है कि उनके नाम पर नकली दवाएं बनाई जा रही थीं। तीन कंपनियां आंतरिक जांच कर रही हैं। इस बीच, लखनऊ की हे मां मेडिको और बंसल मेडिकल एजेंसी के गोदामों पर भी छापेमारी की जा रही है।
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